राजधानी दिल्ली के रूप नगर में स्थित श्री राधागोविन्द मंदिर, जिस का संचालन लछमनदासदास अग्रवाल राधा गोविन्द मंदिर ट्रस्ट करता है। मंदिर का उद्घाटन बड़े धूमधाम से ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया, विक्रम संवत 2028 तदानुसार 24 मई, 1971 को पूज्य स्वामी गुरु चरण दास जी के सान्निध्य में एवं धर्म सम्राट पूज्य स्वामी करपात्री जी और पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य - स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी के आशीर्वाद से संपन्न हुआ था। मंदिर का निर्माण श्री लछमनदास अग्रवाल तथा उनके पुत्रों बालकृष्ण अग्रवाल, जयकिशनदास अग्रवाल, रोशन लाल अग्रवाल एवं मनोहर लाल अग्रवाल जी द्वारा किया गया।

दाक्षिणात्य शैली में बनाए मंदिर में दूर से ही सफेद कंगूरों पर ध्वजा पताकाएं नजर आ जाती हैं। विशेष रूप से  मंदिर के शिखर पर बनी गौ माता का सुंदर चित्र मन को आकर्षित कर लेता है। जयपुर के सफेद संगमरमर, मकराना, धौलपुर एवं कोटा के पत्थरों से बना यह मंदिर अद्भुत कारीगरी का नमूना है। भूतल के सजे धजे दरवाजों से प्रवेश करते ही सामने भगवान श्री कृष्ण और उनकी प्राणप्रिया राधा जी का श्री विग्रह नजर आता है। लगभग 5 फुट के सजे धजे श्री विग्रह का दर्शन करके अद्भुत आकर्षण प्रवाहित होने लगता है। सिर पर मोर पंख, हाथों में बांसुरी और चारों तरफ की सजावट देखकर ऐसा लगता है कि साक्षात वृंदावन ही उतर आया है। दरवाजे के बाहर सुंदर रूप से बने भगवान के वाहन गरुड़, भगवान के पार्षद जय-विजय तथा वीणा बजाते हुए देवर्षि नारद के भित्ति चित्रों को श्रद्धालु एकटक देखते रहते हैं। प्रातःकाल एवं सायंकाल “हरे राम, हरे कृष्ण” एवं “जय श्री राधा गोविंद” कहते हुए भक्त परिक्रमा लगाते हैं। बाईं ओर पर विराजित गौरी पुत्र, रिद्धि-सिद्धि दाता भगवान गणेश के दर्शन करके भक्त मनवांछित फल पाते हैं। दायीं ओर पर सिंहवाहिनी माँ दुर्गा के सुंदर श्रीविग्रह को भक्त टकटकी लगाकर देखते रहते हैं। सुंदर वस्त्र धारण किए हुए अष्टभुजी माँ जिनके हाथों में कमल का फूल, गदा, शंख, तलवार, त्रिशूल, धनुष, अभय मुद्रा, व दंड हैं, माँ भगवती के दर्शन करके भक्त कृतकृत्य हो जाते हैं। पास में ही विराजित समस्त ताप संतापों को दूर करके झोली भर देने वाले श्रीराम भक्त पवनपुत्र हनुमान जी के दर्शन करके भक्त “जय श्रीराम” के नारे लगाने लगते हैं।  

पहली मंजिल पर अपनी सनातन संस्कृति, वैदिक संस्कृति एवं ऋषि संस्कृति का दर्शन कराती है “लछमनदास अग्रवाल पुस्तकालय”। यहां उपलब्ध वेद - पुराण - शास्त्र - रामायण - गीता आदि का पठन-पाठन चलता रहता है।  

समय-समय पर मंदिर में श्रीराम की मर्यादाओं की चर्चा एवं मुरलीवाले श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान होता रहता है। मंदिर में वैदिक विद्वानों के माध्यम से पूजा अर्चना एवं हवन आदि होते रहते हैं।

श्रीराधागोविन्द मंदिर

लछमनदासदास अग्रवाल राधा गोविन्द मंदिर ट्रस्ट

2/1, रूप नगर, दिल्ली-110007
फोन: 011-35513617, +91-8882959436
ईमेल: ldargmtrust@gmail.com
वेबसाइट: www.radhagovindmandirdelhi.in